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    प्राचार्य

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    प्रिय विद्यार्थियों, अभिभावकों, एवं केन्द्रीय विद्यालय परिवार के समस्त सदस्यों……

    सप्रेम नमस्कार।

    केंद्रीय विद्यालय एक ऐसा शिक्षण संस्थान है जहाँ शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, अनुशासन, सृजनात्मकता और राष्ट्रीयता की भावना के साथ आगे बढ़ती है। मुझे यह कहते हुए गर्व होता है कि हमारा विद्यालय एक ऐसे शैक्षिक वातावरण को बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत है जो विद्यार्थियों में न केवल ज्ञानार्जन की अभिलाषा उत्पन्न करता है, बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करता है |

    आज शिक्षा का स्वरूप तीव्र गति से बदल रहा है। 21वीं सदी का छात्र केवल विषयों का विशेषज्ञ नहीं, बल्कि एक अच्छा विचारक, समस्या समाधानकर्ता, सृजनशील व्यक्तित्व, जिम्मेदार नागरिक और सहानुभूतिपूर्ण मानव होना चाहिए। हमारा उद्देश्य है कि हम ऐसे ही भावी नागरिक तैयार करें जो अपनी सोच, क्षमता और नेतृत्व कौशल से भारत को नयी ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दे |

    केंद्रीय विद्यालय संगठन अपने अनुशासन, राष्ट्रीय एकता, सह-शैक्षणिक गतिविधियों, खेलकूद एवं नवाचारोन्मुखी दृष्टिकोण के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इस गौरवपूर्ण विरासत को आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यालय में उपलब्ध आधुनिक संसाधन, अनुभवी एवं समर्पित शिक्षकगण, तकनीकी सुविधाएँ, सुसज्जित प्रयोगशालाएँ, समृद्ध पुस्तकालय और सकारात्मक वातावरण प्रत्येक विद्यार्थी को अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान करते हैं।

    आज की दुनिया अवसरों के साथ-साथ चुनौतियों से भी भरी है। डिजिटल युग में ज्ञान की सीमाएँ विस्तृत हैं, परंतु ज्ञान का सही उपयोग सीखना अनिवार्य है। तकनीकी प्रगति का स्वागत करें, नवीनताओं को अपनाएँ, लेकिन अनुशासन, समय-प्रबंधन, मानव मूल्य और सामाजिक दायित्वों को सदैव प्राथमिकता दें।

    हमारी शिक्षण प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यही है कि विद्यार्थी स्वयं सीखने की क्षमता विकसित करें, जिज्ञासु बनें, प्रश्न पूछें, प्रयोग करें और आत्मनिर्भर बनें। “स्वाध्याय और सतत् प्रयास ही सफलता की कुंजी है”—इस मंत्र को अपने जीवन का मार्गदर्शन बनाएं।

    अभिभावकों का भी इस शैक्षिक यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। घर और विद्यालय मिलकर ही विद्यार्थी के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं। आपसे अपेक्षा है कि आप अपने बच्चों का मार्गदर्शन करें, उनके प्रयासों की सराहना करें, उन्हें अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों का महत्व समझाएँ तथा सकारात्मक वातावरण प्रदान करें। बच्चों के साथ समय बिताएँ, उनके सपनों को सुनें और उन्हें प्रेरित करें कि वे साहस, ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

    हमारे शिक्षकगण विद्यालय की रीढ़ हैं—जो निःस्वार्थ भाव से बच्चों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। शिक्षकों के समर्पण, प्रतिबद्धता और प्रेम के बिना कोई भी शिक्षण संस्थान पूर्ण नहीं कहा जा सकता। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यालय में प्रतिभाशाली एवं प्रेरणादायी शिक्षक हैं जो हर विद्यार्थी को ज्ञान और संस्कारों की ज्योति से आलोकित करने के लिए संकल्पित हैं।

    अंत में, मैं सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालय परिवार को शुभकामनाएँ देता हूँ। आइए मिलकर एक ऐसे शिक्षण वातावरण का निर्माण करें, जहाँ हर बच्चा अपनी क्षमता को पहचान सके, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके और राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सके।

    आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ—

     

    धन्यवाद।

    जय हिन्द।

    देवेन्द्र कुमार मिश्र

                    प्राचार्य

    केंद्रीय विद्यालय,पयागपुर

    जी.जी.आई.सी. परिसर, जौनपुर